पुष्प पद्म भूषण और ज्ञान पीठ पुरुस्कार लौटाने वालों का काला सच
सीरीज़ -१
ये है महान वैज्ञानिक पद्म विभीषण पुष्प मित्र भार्गव (@pushp mitra Bhargav ) इन्होंने 1984 में 2800 सिखों के नरसंहार और इसके भी पहले पंजाब में आतंकियों द्वारा कलबुर्गी की तरह चुन चुन कर मारे गये बिचारकों व बुद्धिजीवियों की हत्याआों से प्रसन्न होकर सन् 1985 मैं इन हत्याओं के लिये ज़िम्मेवार कांग्रेस की ख़ूनी सरकार के हाथों पद्म भूषण पुरुस्कार ग्रहण किया था ।
फिर जब 19 जनवरी 1990 की रात जब कश्मीर में हिन्दू कश्मीरी पण्डितों का भीषण नरसंहार किया गया था , तब इनकी आत्मा गूँगी और बहरी होकर मरी पड़ी थी ।
27फरवरी 2002 को जब 59 हिन्दू गोधरा में ट्रेन में ज़िंदा जला दिये गये थे तथा इसके बाद हुये दंगों में तमाम हिन्दू व मुसलमान तवाह हो गये थे तब भी इनकी आत्मा पुरुस्कार पर पुरुस्कार पाकर पिशाच की तरह नृत्य कर रही थी ।
जो फिर 20 अगस्त 2013 को नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या के बाद तीन साल तक शायद कान में तेल डाल कर सोती रही थी ।
जो February 20,2015 को श्री गोविंद पनसारे की हत्या के नौ माह बाद तक और
30 अगस्त 2015 को प्रोफ़ेसर श्री एम एम कलबुर्गी की नृशंश हत्या के एक माह बाद तक भी नहीं जागी ।
पर 30 september 2015 को एक चोर और गाय की हत्या कर माँस खाने बाले की पिटाईँ पर इनकी छाती फट गई आत्मा हाहाकार कर उठी और इन्होंने अपना कांग्रेस सरकार का दिया हुआ पद्मभूषण का तमग़ा भाजपा की मोदी सरकार को लौटा दिया है ।
क्योंकि उपरोक्त नरसंहारों में मारे गये लोग सिख हिन्दू और मुसलमान थे जो इनकी दृष्टि में गाय की तरह सिर्फ़ जानवर थे और गाय चोरी करके व काटकर खाने वाला एक मात्र इंसान था । सो बहुत सारे महान व गाय के माँस से तृप्त होने वाले साहित्यकारों की पिशाच आत्मायें यकायक रुदन कर उठीं और पुरुस्कार बापसी की होड़ मची हुयी है ।
मैं अपने #facebook व #G+ के मित्रों से अनुरोध करता हूँ कि वह इन नराधम साहित्यकारों के काले इतिहास को खोज कर बेनक़ाब करें ।
। पुष्प मित्र भार्गव वैज्ञानिक
