लाल लाल आँखों वाला सूरज
पश्चिम के नालायक
को देख
उसकी आँखों में ख़ून उतर आया है
उठो हे वीर
वहुत हुआ शाँति पाठ
उठा खड़ग
हो अडिग
युद्ध कर
रणभूमि पर
शत्रु के रक्त से
रणचण्डी का खप्पर
लवालव भर दे
पहन ले आज तू
मुण्ड माल
काट काट
नापाक भाल
दुश्मन के लहू से
माँ भारती के चरणों
का
रक्ताभिषेक कर दे ।
Vikram singh bhadoriya
15 agust 2016
BHIND published on
16 Agust 2017
Gwalior

