गुरुवार, 28 सितंबर 2017

रविवार, 3 सितंबर 2017

EK KHOI HUI SI KAVITA


EK KHOI HUI SI KAVITA 

एक खोई हुई सी कविता
वैठी है 
समय के धुँध में ,
यादों की डोर पकड़े
सपनों के अंतहीन छोर पर

दिल के लम्बे हाथ...
अनन्त सरल रेखा वन कर
चाहते हैं छू  लेना उसे

ओह  ! अनन्त !
पूर्णता की राह में
पूर्णँ शाँति के शून्य से
निकल कर
परम् शाँति के शून्य में 
विलीन होता हुआ
रेखा गणित के विंदु सा 
 असितित्वहीन मैं ......!

..._ k_vikramSingh
8-4-2014 GhatiGaon 
   Gwalior 

Photo curtsy Kamlesh Chauhan "Gauri "