घुमण आये
काले मेघों को
नयन की कोर पर
घिर आई है घटा
बरस जाने दो
चपला संग
नृत्य करते
विद्युतजिव्ह मेघ यह
दरकते हुये
हिमखणड लेकर
ह्रदय की पीर को
करने दो कुछ पल
दुधर्ष तांडव
प्रलय के काल मेघों
संग
बहुत हुआ
अब
विखरने दो
टूट कर
हो ज़़ाने दो खण्ड खण्ड
यह पाखण्ड सब
विक्रम सिंह भदौरिया
२९,-७-२०१९