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ऊँ द्यौ: शांति: अंतरिक्षं शांति:पृथ्वी: शांति: अग्नि पथया: शांति: .... ।
नि:शब्द है अग्निपथ ,
ज्योति हुई शांत है ।
पृथ्वी शांत है ,
आकाश हुआ शांत है ।।
चला गया दूर कहीं ,
प्रणेता अबुल पकीर ।
अग्नि के पँख लिये ,
अनन्त की उड़ान पर
अनाथ कर राष्ट्र को ।।
श्रद्धा नु अश्रुपूरित नमन
विक्रम सिंह भदौरिया । ग्वालियर 27-7-2015 सोम.

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