मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

ख़यालों की झील के उस पार

ख़यालों की झील के उस पार 

यादों की झिलमिल में 

पसरा हुआ  नि:शब्द कुहासा 

उदास है , 

तुम्हारी ही तरह 

कभी चमक उठता है 

विस्तीर्ण काल मेघों की ओढ़नी की कोर पर 

टाँकी गई श्वेत धवल चाँदनी सी 

तुम्हारी ही याद की तरह ... 

........vikram singh bhadoriya ......

           21-dec -2015 Gwalior 

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