रविवार, 11 मार्च 2018

प्रलय मेघ

मत रोको
घुमण आये 
काले मेघों को 
नयन की कोर पर

घिर आई है घटा
बरस जाने दो  

चपला संग
नृत्य करते
विद्युतजिव्ह मेघ यह
दरकते हुये
हिमखणड लेकर
 
ह्रदय की पीर को 
करने दो कुछ पल 
दुधर्ष तांडव
प्रलय के काल मेघों 
संग 
बहुत हुआ 
अब

विखरने दो 
टूट कर
हो ज़़ाने दो खण्ड खण्ड
यह पाखण्ड सब

विक्रम सिंह भदौरिया 
२९,-७-२०१९

4 टिप्‍पणियां:

  1. हृदय की पीर को करने दो दुर्धर्ष ताण्डव!
    पाखंड के अंत के लिये यह ताण्डव अबकी बार
    भारतीय मतदाता ने किया.है।आप के हृदय से
    निःसृत यह ध्वनि मतों के कालेमेघ होकर बरसी
    है।आप की इस कविता का परोक्ष शीर्षक मैं लोकसभा मतदान वर्ष2019 देता हूँ!💐😊

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  2. उत्कृष्ट सृजनशीलता ओजपूर्ण अभिव्यक्ति है कविता में। साधुवाद आपको।

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