रविवार, 26 अप्रैल 2020

मत रोको इन्हें

मत रोको इन्हें .....मोमबत्तियाँ जलाने से  ......ृ! 

इक रौशनी का दिया जलाओ तो सही .....
और चलो तो सही ...
यह सोच कर  कदम बापस न खींचों कि अँधेरा कितना बड़ा है और तुम्हारे दिये का प्रकाश कितना छोटा सा ...
..कदम दर कदम अँधेरे को चीरते तुम्हारे ये कदम ....
..और यह कदम दर कदम तुम्हारा साथी.... 
...यह छोटा सा दिया ...
  यह छोटी सी रौशनी ..
  यही तुम्हें मंजिल तक लेकर जायेगी ..
...जमे हुये मौन को पिघल कर मौम  सा जलने दो ......
मत रोको .... 
इन चीखों को .......
.ये चीखें हैं प्रलय के आने की आहट हैं ...
..मत रोको इन्हें ........
 Kr.vikram singh april 2013

गुरुवार, 12 मार्च 2020

Basanti vayaar main


रंगों के मौसम में  दिल का हर कौना है रंगीन ....

वसंती वयार में  ,

खयालो की शाख पर झूमता पागल पन

तुम्हारी यादों की डोर थामे

 प्रेम पथिक.

 चल रहा

वीते हुये इतिहास का पाथेय लिये ,डगमग पग 

 विकल ह्रदय, विचलित मन,

  पलास सा दग्ध. हुआ है दिग दिगंत ..

                                    विक्रम सिंह भदैरिया 18-3-14

रविवार, 11 मार्च 2018

प्रलय मेघ

मत रोको
घुमण आये 
काले मेघों को 
नयन की कोर पर

घिर आई है घटा
बरस जाने दो  

चपला संग
नृत्य करते
विद्युतजिव्ह मेघ यह
दरकते हुये
हिमखणड लेकर
 
ह्रदय की पीर को 
करने दो कुछ पल 
दुधर्ष तांडव
प्रलय के काल मेघों 
संग 
बहुत हुआ 
अब

विखरने दो 
टूट कर
हो ज़़ाने दो खण्ड खण्ड
यह पाखण्ड सब

विक्रम सिंह भदौरिया 
२९,-७-२०१९

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

रविवार, 3 सितंबर 2017

EK KHOI HUI SI KAVITA


EK KHOI HUI SI KAVITA 

एक खोई हुई सी कविता
वैठी है 
समय के धुँध में ,
यादों की डोर पकड़े
सपनों के अंतहीन छोर पर

दिल के लम्बे हाथ...
अनन्त सरल रेखा वन कर
चाहते हैं छू  लेना उसे

ओह  ! अनन्त !
पूर्णता की राह में
पूर्णँ शाँति के शून्य से
निकल कर
परम् शाँति के शून्य में 
विलीन होता हुआ
रेखा गणित के विंदु सा 
 असितित्वहीन मैं ......!

..._ k_vikramSingh
8-4-2014 GhatiGaon 
   Gwalior 

Photo curtsy Kamlesh Chauhan "Gauri "

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

समर्पण

सचमुच 
मेरे शब्द पिघल उठ्े हैं 
तुम्हारी कलम की आँच से  
तपिश और जिजीविषा से 
हार कर
देखो 
हथियार जमीन पर रख दिये हैं मैने
पूर्ण समर्पण 
  विक्रम २३ -८-२०१७

मंगलवार, 22 अगस्त 2017