गुरुवार, 24 अगस्त 2017

समर्पण

सचमुच 
मेरे शब्द पिघल उठ्े हैं 
तुम्हारी कलम की आँच से  
तपिश और जिजीविषा से 
हार कर
देखो 
हथियार जमीन पर रख दिये हैं मैने
पूर्ण समर्पण 
  विक्रम २३ -८-२०१७

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