शनिवार, 31 जनवरी 2015

Vikramaark.blogspot: कविता

Vikramaark.blogspot: कविता: कविता दिल की रूकी हुई झील के तटबंध तोड़कर वह निकली नदी है ... कविता समय की दुकूल पर हवा की उँगलियों के कोमल स्पर्श की सिहरन है ...  कविता ...

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