शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

" सात जन्मों के बाद " Kamlesh Chauhan "Gauri " का नया उपन्यास

कमलेश चौहान "गौरी " का यह उपन्यास सात जन्मों के विशाल कैनवास पर उकेरी गई एक आदर्श प्रेम गाथा है  जहाँ दो प्रेमी ह्रदयों की मानव सुलभ    कोमल भावनाओं की कश्ती , बाल ,युवा व  ज़रा अवस्थाओं  से , जन्म- मृत्यु , देश -काल व देह की सीमाओं से वेखबर समय के उदधि में   , कवियत्री व उपन्यासकारा कमलेश चौहान के भावुक गीतों की स्वर लहरियों पर थिरकती कभी , मिलन व विछोह की  धूप -छाँव तले डोलती  मचलती सी कभी ,  सात जन्मों के विस्तीर्ण रंगमंच पर मंचित एक  नृत्य नाटिका सदृश्य  रचना है  जिसमें लेखिका मानव ह्दय के प्रेम के साथ साथ  सृष्टि व समिष्ठि के , भौतिक व पराभौतिकी के , कल्पना व यथार्थ के मिलन की अद्भुत प्रस्तुति करने में पूर्णत: सफल रहीं हैं,  और साथ ही  वह  अपने पूर्व उपन्यासों "सात समुन्द्र पार " तथा  "सात फेरों से धोखा " की तरह ही इस उपन्यास में भी वह अपनी स्त्री ह्र्दय की कुशल चित्रकार की छवि को प्रतिस्थापित करने में  पूर्णत:  सफल रहीं हैं ँ। मैं उनके पूर्व उपन्यासों , कविताओं तथा  पटकथाओं की भाँति इस उपन्यास की  भी काल जयी रचनाओं में शुमार होने की ,और सफलता की ,  कामना करता हूँ । 
                            Vikram singh bhadoriya   
                             Ghatigaon GWALIOR 
                     
              7-2-2015 

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