काव्योदय केपृष्ठ पर
विश्व नारी दिवस पर काव्योदय के पीठ पर लिखी एक अकविता ...
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मातृ सत्ता की गरिमा का असर
राम की सरपरस्त वन करती वसर,
कृष्ण की माँ बनने तक का सफर ,
वो कौशल्या नंदन वो यशोदा का पुत्तर
राम की वो शक्ति पूजा
वो महिषासुर मर्दिनी
वो अर्ध नारीश्वर शिवा
वो शिव की अर्धांगिनी
वो सीता केअनुगामी सीताराम
वो राधे के अनुगामी राधेश्याम
कहाँ गये सब
कहाँ गया वह गौरव ,
वो राह में कब रुकी
वो राह में कब थकी
कि ठाँव ठाँव गई छली
रह गई पीछे वो सदी सदी
निकल गया आगे
सीता का श्री राम वह
राधा का घनश्याम वह
कहाँ और कब छली गई वो
राधा छलिया कृष्ण से
सीता सनातन पुरूष दम्भ से
जुये में नीलाम पाँचाली की अस्मिता
तार तार अंत: वस्त्र ,
तार तार स्वाभिमान
पाँडु पुत्रों की अनुगामनी
बनने की सज़ा
भुगतती वो मानिनी
अग्नि दग्धा कोख से उत्पन्न वो
दीप शिखा ज्वाजल्यमान
स्वयं पराजिता आज वह अपराजिता
किस से कहे अाज वह निज व्यथा
उसे तो बस अपनों ने ही छला । vikram singh bhadoriya
8-3-2016
Bhind
निःशब्द 👌
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