निकल आये है
झुंड के झुंड
राजनीति के ज़हरीले वरसाती कीड़े
कुछ वीर वहूटी सी
तिरछी लाल टोपियाँ
कुछ लाल दुपट्टे भी
बरगला रहे है,
नई पीढ़ी के बच्चों को
सिखला रहे हैं राष्ट्र द्रोह
कुछ भी कहने की आजादी
भारत माता को गाली भी ....!
नाच रहे हैं,
रक्त पिपासु भेड़िये
खड़रम् खड़रम्
राष्ट्र भक्ति का मांस नौचते गिद्ध
से कैसी आज़ादी है ?
मीर जाफ़र ,जयचंदों को
पीठ पर छुरा भौंकते
ब्रुटस , और
अरण्य रुदन करती
माँ भारती !
विक्रम सिंह भदौरिया
१८-२-२०१६ बुधवार ,ग्वालियर

बेहतरीन 👍
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