मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

मधु मय वसंत

स्वागत सुखकर मधुमय वसंत ।
उसने कहा था मैं मिलूँगा 
फूलों में ,कलियों में , 
लहलहाती  अमराइयों मैं ,
प्रेमी के ह्दय की अतल गहराइयों में ,
बचपन की खिलखिलाती निश्छल हँसी मैं ,
क्योंकि मैं प्रेम हूँ , 
जो हर वार 
छले जाने के बाद  भी
 लौट आता हूँ  ,
पुन: पुन: धोखा खाने के बाद भी , 
एक बार फिर 
छले जाने की बाट मैं ..... 
स्वागत सुखकर मधुमय वसंत ....

विक्रम सिंह भदौरिया 
वसंतोत्सव 14फरवरी 2014 

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