स्वागत सुखकर मधुमय वसंत ।
उसने कहा था मैं मिलूँगा
फूलों में ,कलियों में ,
लहलहाती अमराइयों मैं ,
प्रेमी के ह्दय की अतल गहराइयों में ,
बचपन की खिलखिलाती निश्छल हँसी मैं ,
क्योंकि मैं प्रेम हूँ ,
जो हर वार
छले जाने के बाद भी
लौट आता हूँ ,
पुन: पुन: धोखा खाने के बाद भी ,
एक बार फिर
छले जाने की बाट मैं .....
स्वागत सुखकर मधुमय वसंत ....
विक्रम सिंह भदौरिया
वसंतोत्सव 14फरवरी 2014
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें