आज से तीन वर्ष पूर्व लिखी गईँ माँ रणचण्डी कालरात्रि के समक्ष की गई अभिलाषा को हमारे रणवांकुरों ने पाकिस्तान के आतंकी सुअर बाड़े में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करके अक्षरश: सत्य कर दिया है ।
उन्हीं वीरों के सम्मान में पुन: शेयर कर रहा हू
बंन्दे अंम्बे ! े
न बर दे मुझे न अमर कर दे
मैं हूँ कपूत तेरा, रख सका न लाज तेरी
मार कर लात एक
ठेल कर नरक द्वार
अन्दर कर दे
नर पिशाच भेड़ियों के बीच
कर सकूँ वध उनका
बस ! एक खंङ हस्त कर दे ।
बंन्दे अम्बे !
न वर दे मुझे न अभय दे
छोड़ दे तू वरद हस्त, बस!
मुष्टि में शत्रु का सर दे !
पहिन ले तू फिर से मुंण्डमाल
लपलपाती जिह्व ज्वाल
कर संहार पंच मार्ग
जय चंद ओ मीर जार,
गोरी औ ग़ज़नवी
सब एक बार, एक घाट ।
बंन्दे अम्बे !
न वरदे मुझे न अमर कर दे ,
उग आये हैं रक्त बीज
नर पिशाच ओ नराधम
न तू मुझे शक्ति दे न भक्ति दे
बस! भर दे कराल ज्वाल
उर में,
अंतहीन, शत्रु रक्त प्यास दे,
बंन्दे अंम्बे !
न बरदे मुझे न अभय दे ....
....। Vikram Singh Bhadoriya

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