शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

वंदे अँम्बे

आज से तीन वर्ष पूर्व लिखी गईँ माँ रणचण्डी कालरात्रि के समक्ष की गई अभिलाषा को हमारे रणवांकुरों ने पाकिस्तान के आतंकी सुअर बाड़े में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करके अक्षरश: सत्य कर दिया है । 
उन्हीं वीरों  के सम्मान में पुन: शेयर कर रहा हू

बंन्दे अंम्बे !  े
न बर दे मुझे न अमर कर दे 

मैं हूँ कपूत तेरा,  रख सका न लाज तेरी 
मार कर लात एक
ठेल कर नरक द्वार 
अन्दर कर  दे 
नर पिशाच भेड़ियों के बीच 
कर सकूँ वध उनका 
बस !  एक खंङ हस्त कर दे । 

बंन्दे अम्बे !  
न वर दे मुझे न अभय दे 
छोड़ दे तू वरद हस्त, बस!
मुष्टि में शत्रु का सर दे  !  
पहिन ले तू फिर से मुंण्डमाल 
लपलपाती जिह्व ज्वाल 
कर संहार पंच मार्ग 
जय चंद ओ मीर जार,
गोरी औ ग़ज़नवी 
सब एक बार,  एक घाट ।

बंन्दे अम्बे !
न वरदे मुझे न  अमर कर दे  ,

उग आये हैं रक्त बीज 
नर पिशाच ओ नराधम 
न तू मुझे शक्ति दे न भक्ति दे 
बस!  भर दे कराल ज्वाल 
उर में,  
अंतहीन,  शत्रु रक्त प्यास दे,  

बंन्दे अंम्बे !  
न बरदे मुझे न अभय दे   .... 

....।  Vikram Singh Bhadoriya 
         
                         

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