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अब ग्रेगेरियन कलेंडर के नये साल की शुरूआत
में वस चंद एक घंटे वाकी है पर एक सवाल कई सालों से मन में घुमड़ रहा था कि आखिर नया साल मनाते क्यों है ? तो गूगल बाबा से पूछ ने की ग़ुस्ताख़ी कर बैठे । और गूगलबाबा ने ढोल की पोल क्या खोली कि बस यूँ समझो कि ढोल ही फूट गया । बोले नया साल यानि एक जनवरी को ईसा मसीह का नाम करण संस्कार किया गया था व ख़तना किया गया था सो इसी खुशी में सारे ईसाई एक जनवरी को बहुत उत्साह व समारोह पूर्वक एक जनवरी सैलिब्रेट करते है ।
अब ईसाई ईसा मसीह को ख़तना किये जाने पर ख़ुश और मुसलमान यह सोच कर ख़ुश कि कम से कम ईसाइयों का मसीहा तो हमारी तरह ख़तना किया गया सो नये साल में ख़तना भाई की जय और इसी बहाने नई साल में इस्लाम में हराम शराब माई की जय बोलते है !!!!
पर एक सबाल अभी भी अनुत्तरित था कि ईसाई और मुसलमान ख़तना करवाने की ख़ुशी मनायें सो तो ठीक है पर हिन्दू विना ख़तना करवाये ही "
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना " क्यूँ हो जाता है ? ?? बहुत सेंकने पर दिमाग़ से निकली आँच ने बताया "ग़ुलाम और मालिक का फ़ंडा " यानि १००० साल हमारे मालिक रहे मुसलमान और ४०० वरस हमारे मालिक रहे अँग्रेज ईसाई , सो अगर अपने अब्बा हुज़ूर का ख़तना करवाने की ख़ुशी में मालिक नाचे तो हम ग़ुलाम अपनी वफादारी दिखाने को क्यों ना नाचें ????? सो हम तो नया साल का पहला दिन और हमारे आका के आका के नाम करण व आका के ख़तना पर जी खोल कर नाचते अा रहे है आज भी दारू पीकर दिल खोल कर नाचेंगे व वधाइयाँ गायेंगे । फटाके भी चलायेंगे क्योंकि दीवाली को इन्हीं फटाकों को हमने अपने भाई बड़े ग़ुलाम अली हाई कोर्ट व ससुर सुपरीम कोरट के कहने पर अपने दिमाग़ से ग़ुलाम हिन्दू भाई जान की बड़ी वैज्ञानिक प्रदूषण सोच के खरदूषणों के कहने पर अपने नन्हे मुन्नों तो फोड़ने देना तो दूर छूने भी नहीं दिया था । पर लार तो हम भी वहुत टपकाये थे फोड़ने फुडबाने की ख़ातिर । सो आज न हम मानेंगे भइ्य्यन चाहे ससुरवा सुपरीमा कोरट वा भेज दे हमें जेल में । सो सब का नया मुबारिक कहते है ,, अरे नाहीं .... हम कहा आप सबन का हैप्पी न्यू ईअर ।।।। :
Vikram singh bhadoriya
Aanand Nagar Gwalior
Re written on 31st Dec 2016

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