बुधवार, 30 नवंबर 2016

गुरिन्दर के "शब्दों के सफर "पर कमैंट

     पाँच साल पहले @Dr Gurinder Gil "Gauri " की पहली कविता जो मैंने पढ़ी "ज़िंदगी " नाम से ही थी । जो ज़िंदगी का फ़लसफ़ा लिये उगते हुये प्रेम का एक अँखुआ ,सुनहरी धूप में गुनगुनाता पल्लवित होता" प्रेम वृक्ष " फिर बुढ़ापे  की तरफ़ लम्बे लम्बे डग भरता , जीवन के संघर्ष से थका हारे प्रेम पथिक और अंत में उड़ती हुई शम्शान की राख के साथ अनन्त के अथाह सागर में विलीन होती ज़िंदगी का फ़लसफ़ा लिये.   यह  अकेली कविता ही  मानो भविष्य के उनके कविता संग्रह "राज- ए- दिल " (सन् २०१३ ) ,नग़मा -ए-दिल ( २०१४)  "इस मुक़ाम पर " ( २०१५ ) तथा इसी वर्ष प्रकाशित सूफ़ियाना "करम फरमाई " के बाद अब सन् २०१६ में ही सद्य:प्रकाशित व व  पंजाब कला एवं साहित्य अकादमी "पंकस" केमँञ्च से लोकार्पित इस कविता संग्रह  "शब्दों के सफ़र "में प्रतिबिम्बित हो रही थी।  


 "शब्दों का सफर "  में सन्नहित "गौरी " गुरिन्दर गिल की कबिताये ं भी पाठक को  कभी उगते हुये सूरज की स्वर्णिम लालिमा और मलयज पवन की शीतल सुगंधित वयार सा आभास लिये  " ... तो कभी

    दोपहर की चिलचिलाती धूप में तपते हुये लाल लाल आँखों वाले सूरज तले ज़िंदगी के संघर्ष मैं प्यार और मनुहार और तमस की धूप छाँव लिये कसमसाती हुई ज़िंदगी के गीत गाती हुंईं मिलतीं हैं , 

   तो कहीं शाम को थके पाँव घर लौटते हुये श्रमिक की क्लांत वेदना लिये तो कभी ,अल्लाह की याद में अजान के गूँजते हुये स्वर , उनींदी आँखों से सृष्टि को निहारते , नींद से बोझिल पलकें लिये  विश्राम कक्ष की ओर जाते हुये   शाम के  सूरज और  समुद्र की रेत पर गिर कर छपाक की ध्वनि के साथ शांत होती समुद्री लहरों के स्वर सा अहसास कराती हैं ।             सूफ़ियाना कविताओं का " यह शब्दों का (सुहाना ) सफर " सचमुच में   डाॅ. गुरिंन्दर गिल "गौरी " की कविताओं के रूझान , उत्थान व चरमोत्कर्ष की ओर जाती हुई, हिन्द के पंजाब से मलय एशिया तक हिन्दी साहित्य की सेवा में लीन"एम्बेसडर आॅफ हिंन्दी " अवार्ड से विभूषित  कवियत्री की कविता के सफ़र के सफ़रनामा का । ...... यह सार संक्षेप है । 

  ईश्वर से प्रार्थना है । यह मलेशियाई हिन्दी साहित्य के माथे की विंदी में टाँकी गई हीरक कणिका सी यह कवियत्री "गौरी " गुरिन्दर गिल हिंन्दी  साहित्य के आकाश में चमकता सूरज बने । एवमस्तु ।। 


     


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