सुरमई नयनों की कोर से
रतनारे रुखसारों की लाली
लेकर यह मधुमय वसंत ,
चढ़ आया है देखो पंचसर ,
ले पुष्पराग यह धनुष तान,
घायल कर डाले सब ह्रदय त्राण
फिर भी है उन्मत्त ,यह प्राण प्राण
उड़ते फिरते हैं ले रंग संग
गालों पर मलते गुलाल ....
स्वागत प्रिय सुखकर वसंत ....!
--Vikram singh bhadoriya
Holi 12 march 2017
Photo courtesy Dr Neetu Sikarwar
आपकी कविता के रंगों ने अपने रंगों से सराबोर कर दिया ,वाह बहुत सुंदर �
जवाब देंहटाएंसुंदर लेखन हेतु बधाई स्वीकारें ��
वहुत वहुत शुक्रिया नीलू नीलम जी
हटाएंयह सब हमने आप से सीखा है धन्यवाद पर साथ मैं आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी की भी अपेक्षा है
जवाब देंहटाएंWaaaaaaaaaaaah.....
जवाब देंहटाएंAapke Ehsaas Aur Jazbaat ki Daad deti hoon......
Lajawaaaaaaaaaaaaab......
सादर धन्यवाद
हटाएंअनुपम,अद्वितीय कितना भावप्रवण, बहुत ही सुदंर अभिव्यक्ति
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