रविवार, 12 मार्च 2017

होली २०१७मार्च१२

सुरमई नयनों की कोर से 
रतनारे रुखसारों की लाली
लेकर यह मधुमय वसंत ,
चढ़ आया है देखो पंचसर ,
 ले पुष्पराग यह धनुष तान,
घायल कर डाले सब ह्रदय त्राण
फिर भी है उन्मत्त ,यह प्राण प्राण 
उड़ते फिरते हैं ले रंग संग 
गालों पर मलते गुलाल ....
स्वागत प्रिय सुखकर वसंत ....!
--Vikram singh bhadoriya 
    Holi 12 march 2017 
Photo courtesy Dr Neetu Sikarwar

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी कविता के रंगों ने अपने रंगों से सराबोर कर दिया ,वाह बहुत सुंदर �
    सुंदर लेखन हेतु बधाई स्वीकारें ��

    जवाब देंहटाएं
  2. यह सब हमने आप से सीखा है धन्यवाद पर साथ मैं आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी की भी अपेक्षा है

    जवाब देंहटाएं
  3. Waaaaaaaaaaaah.....
    Aapke Ehsaas Aur Jazbaat ki Daad deti hoon......
    Lajawaaaaaaaaaaaaab......

    जवाब देंहटाएं
  4. अनुपम,अद्वितीय कितना भावप्रवण, बहुत ही सुदंर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं