रविवार, 3 सितंबर 2017

EK KHOI HUI SI KAVITA


EK KHOI HUI SI KAVITA 

एक खोई हुई सी कविता
वैठी है 
समय के धुँध में ,
यादों की डोर पकड़े
सपनों के अंतहीन छोर पर

दिल के लम्बे हाथ...
अनन्त सरल रेखा वन कर
चाहते हैं छू  लेना उसे

ओह  ! अनन्त !
पूर्णता की राह में
पूर्णँ शाँति के शून्य से
निकल कर
परम् शाँति के शून्य में 
विलीन होता हुआ
रेखा गणित के विंदु सा 
 असितित्वहीन मैं ......!

..._ k_vikramSingh
8-4-2014 GhatiGaon 
   Gwalior 

Photo curtsy Kamlesh Chauhan "Gauri "

2 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार.. अद्भुत
    इसलिए कि हम आकृति को पकड़ते हैं
    कल्पना में भावों को यत्नभर जकड़ते है
    शून्य के भित्तिचित्र अस्थायी होते है
    उनके आकर्षण में हम जीवन तक खोते है..

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    1. बहुत-बहुत शुक्रिया और आभार डाॅ ब्रजेश जी

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