EK KHOI HUI SI KAVITA
एक खोई हुई सी कविता
वैठी है
समय के धुँध में ,
यादों की डोर पकड़े
सपनों के अंतहीन छोर पर
दिल के लम्बे हाथ...
अनन्त सरल रेखा वन कर
चाहते हैं छू लेना उसे
ओह ! अनन्त !
पूर्णता की राह में
पूर्णँ शाँति के शून्य से
निकल कर
परम् शाँति के शून्य में
विलीन होता हुआ
रेखा गणित के विंदु सा
असितित्वहीन मैं ......!
..._ k_vikramSingh
8-4-2014 GhatiGaon
Gwalior
Photo curtsy Kamlesh Chauhan "Gauri "

शानदार.. अद्भुत
जवाब देंहटाएंइसलिए कि हम आकृति को पकड़ते हैं
कल्पना में भावों को यत्नभर जकड़ते है
शून्य के भित्तिचित्र अस्थायी होते है
उनके आकर्षण में हम जीवन तक खोते है..
बहुत-बहुत शुक्रिया और आभार डाॅ ब्रजेश जी
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