मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

लकड़बघ्घे

Lakkad baggghey 

लकड़बघ्घे   ।      (एक अकविता वस यूँही) 


खुदा के वेश में 

जन्मते शैतान 

रक्त बीज 

जहरीले बरषाती कीड़े 

या लकडबघ्घे 

जीवित माँ भारती का 

मांस नौच नौच कर खाते 

अल्लाहो अकबर गाते 

नरपिशाच 


क्या खुदा वाकई मर गया है?

इन शैतानों को जन्म देने के बाद 

या फिर 

डर कर छुप गया है 

किसी खोह मैं 

इन रक्त पिपासु लकड़बघ्घों के डर से 

थरथर कांपता 

सर के बाल नौचता हुआ खुदा .....

किस मनहूस घडडी में

उसने रच दिया 

इन मानवता के रक्त के प्यासे भेड़ियों को 

जो कर रहे हैं लहू लुहान 

मासूम बच्चों के खून से 

लाचार औरतों की आबरू 

तार तार 


स्वर्ग  में 

नब्बे हूरों और 

बहत्तर लौंडों के साथ अप्राकृतिक वासना की चाह में

मार डाला खुदा को 

बेबजह बे कसूर 


हिजड़ों के वेश में 

बैठे हुये शासनाध्यक्ष 

कापुरुष 

कायर 

पुरुषो अधम 

राज कर रहा

प्रजातंत्र के गधा तंत्र   पर 

निरंकुश  नौकर तंन्त्र 


अपने ही देश में 

वेगाने हुये 

निराश्रित शरणार्थी 

लुटी पिटी औरतें 

धरती के स्वर्ग पर 

काबिज हैं लकड़बघ्घे 

रक्त पिपासु, नराधम 

और हिजड़ा प्रजातन्त्र

 और स्यूडो सैक्युलेरिज्म 

प्रजा की पीठ पर सवार 

बेईमान  नौकर तन्त्र 


आशा की कोई किरन नहीं दूर तक

बस निविड़ अंधकार  

निराशा का चीत्कार

 हाहा कार 

शरणार्थी शिविरों में 

सिमटी दुबकी जिन्दगियां 

अपने ही घर में घुसे 

अट्टहास करते 

क्रूर लकडडबघ्घों को ताकती 

लाचार निगाहें 


धरती का स्वर्ग 

आज 

धरती का नर्क है 

जहां नाचते हैं

खुदा के वेश में 

शैतान नंगे होकर   । ।      6-04— 2013 ग्वालियर । 

....................

सोमवार, 8 दिसंबर 2014

हमारे आने पर ...

हमारे आने पर 

उनके अपनों का रूठ जाने का डर था  ।

न आने पर सितम ओ बेवफ़ाई की तोहमत 


होठ सी लेने दे मुझे 

वंद पलकों के मानिंन्द 

न तुझे पलकें झुकाने की जरूरत 

न मेरे कुछ कहने का डर होगा  । 

........

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.....Vikram Singh Bhadoriya

7 oct.2013 Ghatigaon

Photo curtsy .. Dr Neetu sikarwar 

रविवार, 30 नवंबर 2014

वो इक शख़्स

वो इक शख्श जिसने चाहा मुझे 

   खाक होजाने के बाद भी  ,

याद आता है वो आज मुझे 

होश  खो देने के बाद भी  । 


किस कदर तरसी होगी वो रूह  

जिस्म में होने के बाद भी । 

कि अक्स बाकी है , खुमार बाकी है 

उसके   फना   होजाने के बाद   भी । 


इक दर्द का सैलाव था 

इक आंसुओं का दरिया था 

उसके अपने सीने में , 

मैं ही रहा बेखबर  

सारी उम्र बीत जाने के बाद भी । 


विक्रम सिंह भदौरिया़़़ ़़ 

२२-१२-२०१३ घाटी गाँव 


संशय के आँगन में ...

इन सब का ज़मीर ....

अचानक जी उठा है 

विचार तन्त्र झंकृत हैं , 

शायद कोई नया गुल खिलेगा 

अब 

संशय के आंगन में ..... 

 ................. विक्रम सिंह भदौरिया .......

                   23-12-2013...

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

शालभँजिका....

शालभँजिका 

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ओ शालभँजिका मेरे मन उपवन की 

 मेरे जीवन की मधुम़य वसंत तुम

तिर अन्तर्जाल की लहरों पर 

आई थी जब तुम चुपके से 

जीवन के विलसित प्रहरों पर

छाई वन कर वसंत राग 

जीवन के इस वियावान में 

प्रसरित मृदुल चाँदनी सी तुम

महका मन का वह भँज शालवन

खिल उठा प्रमुदित अशोक द्रुम वह 

पाकर मादक तव पद प्रहार

ओ शालभँजिके मेरे मन उपवन की ...

२१-११-२०१४ आदरणीया कमलेश चौहान के जन्म दिन पर शुभकामनाओं सहित सादर ... !

@kamlesh chauhan @gurinder gill , @rajesh shukla , @neelu neelam

रविवार, 16 नवंबर 2014

ये जो समेटा है मैंने ...

ये जो समेटा है मैंने ,

वही  न , 

जो तुमने लिखा था कभी ,

अपनी यादों की कलम से

बक्त  के सीने पर

इ"च दर इ"च 

तुमने ...

जो विखेरा था .. 

मेरे बजूद को

जर्रा  जर्रा..... ,हरफ  दर हरफ़

 कोमा ,अल्प विराम और पुर्ण विराम के विना.....

ओ  वक्त!   जरा ठहरो ,

कर सकूँ मैं हिसाब उसका ....ँ

 जो है मेरी पोटली में

 समेटे हुये 

कुछ लम्हे तुम्हारीयादों के

तुम्हारी कलम से गिरे हुये कुछ  स्वर्ण बिन्दु

कुछ आहें

कुछ स्मित हास्य 

तुम्हारे अधरों का ...

तुम्हारी  कलम केहाथों से  बुने हुय...े

कुछ अक्षरों के गुच्छे हैं 

तुम्हारी  यादों के उलझे हुये खयालों की तरह .


               Vikram singh bhadoriya 

                 20-07-2017 Bhind 

दीवाना बना देती हो ज़माने को ....

क्यों

छू देती हो 

भावनाओं की कोंपलों को .

 तुम   

अपने  अहसास की उँगलियों से .. 

कि उन्हें 

तुम्हारी उँगलियाँ  ...

उनकी अपनी   उँगलियों जैसी लगतीं है ..

दीवाना बना देती हो जमाने को ....

अपनी तवारीख  को 

उनकी दीवालों पर लिख कर 

खुद तो दीवानी हो पर ...

दोष   देती हो जमाने को...........!

   (अपना   दीवाना  वना कर )....  :!


     विक्रम सिंह भदौरिया 

३०-८-२०१७ (re posted & published at my blog ) 

Photo curtsy - Dr Neetu Sikarwsr