गुरुवार, 20 नवंबर 2014

शालभँजिका....

शालभँजिका 

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ओ शालभँजिका मेरे मन उपवन की 

 मेरे जीवन की मधुम़य वसंत तुम

तिर अन्तर्जाल की लहरों पर 

आई थी जब तुम चुपके से 

जीवन के विलसित प्रहरों पर

छाई वन कर वसंत राग 

जीवन के इस वियावान में 

प्रसरित मृदुल चाँदनी सी तुम

महका मन का वह भँज शालवन

खिल उठा प्रमुदित अशोक द्रुम वह 

पाकर मादक तव पद प्रहार

ओ शालभँजिके मेरे मन उपवन की ...

२१-११-२०१४ आदरणीया कमलेश चौहान के जन्म दिन पर शुभकामनाओं सहित सादर ... !

@kamlesh chauhan @gurinder gill , @rajesh shukla , @neelu neelam

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