.......... मात्ृ पूजन ......
कर रहे वह मातृ पूजन
निज मातु को दुत्कार कर
पित्र पक्ष श्राद्ध श्रद्धावनत
मृत पितरों को तार कर
निज स्वर्ग वासी वा संसारवासी
मातृ कुल को नकार कर
प्यार व दुलार मूर्ति विस्मृत
पाषाण मूर्ति पगावनत ,
कर जीवंत मूर्ति विसर्जित़
झूमते गरबा में
निज गर्भ धारिणी विसारकर
चाहते कल्याण मात्ु , कल्याण मात्ु
पाषाण प्रतिमा पग रखार कर ़
कहो किस भाँति हो कल्याण उनका
भ्रूण हन्ता अश्वत्थामा , मातृ हन्ता परशुराम का
Vikram singh bhadoriya
Ghatigaon 28-9-14
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें