जब हम नारी हित की बात करते हैं या नारी कल्याण के लिये कोई कानून बनाते हैं , उस बक्त भी हम नारी के प्रति अपने पौरुषेय दुराग्रह से मुक्त नहीं होते हैं और ऐसी मन: स्थिति से उपजा कोई भी कानून स्त्री का कभी भी भला नहीं कर सकता ।
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