बुधवार, 12 नवंबर 2014

असली नोबेल की हक़दार हमारी सेना हा

दुखियारी मलाला को नोवेल सांत्वना पुरुस्कार की तरह मिला तो दूसरी तरफ़ कैलाश सत्यार्थी को सरकारी पैसे पर NGO बचपन बचाओ आन्दोलन चलाने के लिये पर  इन्होंने कहाँ किस शाँति को बचाया किसी को नहीं मालूम पर......असली शांँति की हक़दार तो हमारी BSF k jawan hai जिन्होंने २४ घण्टों में बार्डर पर शाँति वहाल कर दी


Vikram singh bhadoriya 

Ghatigaon  10 oct -1014

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें