दुखियारी मलाला को नोवेल सांत्वना पुरुस्कार की तरह मिला तो दूसरी तरफ़ कैलाश सत्यार्थी को सरकारी पैसे पर NGO बचपन बचाओ आन्दोलन चलाने के लिये पर इन्होंने कहाँ किस शाँति को बचाया किसी को नहीं मालूम पर......असली शांँति की हक़दार तो हमारी BSF k jawan hai जिन्होंने २४ घण्टों में बार्डर पर शाँति वहाल कर दी
Vikram singh bhadoriya
Ghatigaon 10 oct -1014
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