रविवार, 30 नवंबर 2014

संशय के आँगन में ...

इन सब का ज़मीर ....

अचानक जी उठा है 

विचार तन्त्र झंकृत हैं , 

शायद कोई नया गुल खिलेगा 

अब 

संशय के आंगन में ..... 

 ................. विक्रम सिंह भदौरिया .......

                   23-12-2013...

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