इन सब का ज़मीर ....
अचानक जी उठा है
विचार तन्त्र झंकृत हैं ,
शायद कोई नया गुल खिलेगा
अब
संशय के आंगन में .....
................. विक्रम सिंह भदौरिया .......
23-12-2013...
Waah
Waah
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