बुधवार, 9 सितंबर 2015
मंगलवार, 1 सितंबर 2015
करीम पठान अनमोल (KP Anmol ) की FB POST पर
बीज वनने की चाह में ,
अहर्निश
ज़मीन वन कर
यह
अविचल ...
प्रस्तर ,
यह ज़मीर तुम्हारा
आख़िर
फूट पड़ता है
....
सरस , सतत,सलिल प्रेम निर्झर
.बन ..!
बह निकलते हो तुम
सदा
"अनमोल "अकूत अथाह
जलराशि उदधि तुम .... !!!
Vikram singh bhadoriya
Bhind 2-9-2015 wed . 4.10am
मंगलवार, 4 अगस्त 2015
विचारों के उत्तुंग शिखर पर
DIL NE KABHI SOCHA THA,
Man vicharon ke utung shikhar par ek
Akela virchh hota
Sirsti ke suprabhat ki
Usha ki pahali kiran
Mere nav viksit taru pallawon se ath kheliyan karti ,
Par tabhi tuti tandraa
Uttar main MAYA ka kroor attahaas se
KENDR main Bhristachaari NANGON ke naach se
Purav main MAMATA KE niraday cheetkar se
Nyay ke liye hahakar karate ,
Hajaron ANNA HAZAARF
Sach bole kar LANGOTI bacha kar bhagate baba Ram Dev.
दिल ने कभी सोचा था ..
मैं विचारों के उत्तुंग शिखर पर ,
एक अकेला वृक्ष होता ।
सृष्टि के सुप्रभात की ,उषा की पहली किरन...
मेरे नव विकसित तरु पल्लवों से अठखेलियाँ करती
पर तभी , टूटी तंन्द्रा
उत्तर में माया के क्रूर अट्टहास से
केन्द्र में भ्रष्टाचारी नंगों के नाच से
पूर्व में ममता के निर्दय चीत्कार से
न्याय के लिये हाहाकार करते...
हज़ारों अन्ना हज़ारे और ,
सच वोल कर लँगोटी वचाने की जुगत में
मैदान छोड़कर भागते बाबा रामदेव ।
विक्रम सिंह भदौरिया
५अगस्त २०१५
सोमवार, 27 जुलाई 2015
महा महिम अबुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम के महा प्रयाण पर
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ऊँ द्यौ: शांति: अंतरिक्षं शांति:पृथ्वी: शांति: अग्नि पथया: शांति: .... ।
नि:शब्द है अग्निपथ ,
ज्योति हुई शांत है ।
पृथ्वी शांत है ,
आकाश हुआ शांत है ।।
चला गया दूर कहीं ,
प्रणेता अबुल पकीर ।
अग्नि के पँख लिये ,
अनन्त की उड़ान पर
अनाथ कर राष्ट्र को ।।
श्रद्धा नु अश्रुपूरित नमन
विक्रम सिंह भदौरिया । ग्वालियर 27-7-2015 सोम.
रविवार, 28 जून 2015
शिक्षा में ठेकेदारी प्रथा की हिमायत और भगवा करण का विरोध ।
शिक्षा में ठेकेदारी प्रथा और शिक्षा
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के भगवा करण का हौआ ।
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आज देश में शिक्षा में ठेकेदारी प्रथा के समर्थक ही हैं जो शिक्षा पद्यति में सुधार के किसी भी प्रयास का विरोध करने के लिये शिक्षा का भगवा करण का हौआ खड़ा करते है
हालात यह हैं कि प्रार्थमिक शिक्षा का पूर्ण रूपेण ठेकेदारी करण शासन ने कर दिया है और उच्च शिक्षा को निजी शिक्षा उद्योग के हवाले करने के साथ साथ इस बात के पुख़्ता प्रवंध किये गये है कि प्रतिभावान लेकिन निर्धन विद्यार्थी किसी भी प्रकार से उच्च शिक्षा प्राप्त न कर सकें और अयोग्य लेकिन डफ़र विद्या की अर्थी आरक्षण या पैसे के बल पर डिग्री प्राप्त मूर्खों को शासन में उच्च पदों पर विराजमान करके राष्ट्र का ब्रेन ड्रेन करके उसे विकास पथ पर से पीछे ढकेला जा सके ।
शिक्षा के ठेकेदारों यानि (संविदा शिक्षकों )की भर्ती के लिये वाकायदा निविदायें आमन्त्रित की जाती है । और नक़ल से थर्ड क्लास हायर सेकेण्डरी पास पैसे के वल पर शिक्षा का बँटाढार करने यानि पढ़ाने का ठेका पा जाते हैं ।
दूसरी तरफ़ कला व समाजशास्त्र साहित्य व इतिहास की शिक्षा ठप्प हो चुकी है और उच्च तकनीकी शिक्षा का पूर्ण औद्योगिकीकरण सरकार ने करके इसे भी शिक्षा माफ़िया के हवाले कर दिया है ।
नई शिक्षा नीति के तहत MBBS के आगे उच्च शिक्षा की अभिलाषा रखने वाले विद्यार्थी को PPG के वहाने रोका जाता है वहीं अयोग्य विद्या की अर्थियों को सिर्फ जातिगत आरक्षण के सहारे भविष्य में देश का कर्ण धार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया जाता है । अगर कोई मेधावी क्षात्र इन वाधाओं को पार करके आगे बढ़ कर शोध करने के लिये research करने की सोचे तो उसे फिर से पी एच डी एन्ट्र्ेंस टैस्ट देना पड़ता है । क्योकि हमारी सरकार इस बात का पूख्ता इंतज़ाम कर देना चाहती है कि कोई मेधावी क्षात्र किसी भी तरह से राष्ट्र का ब्रेन वन कर उनके लिये ख़तरा न वन पाये ।
इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये शिक्षा विभाग के नियम भी वनाये गये हैं कि ,यदि कोई मेधावी छात्र एक से अधिक विषय ों में एक साथ M A या MSc या M PHIL करना चाहे तो , उसे इजाज़त नहीं हैं यह सरकारी नियम है ।
देश के कानून का ज्ञान होना हर व्यक्ति के लिये अनिवार्य माना जाता है पर , इसके एक दम उलट सरका यह पुख़्ता व्यवस्था करने जा रही है कि कानून कोई आसानी से न पढ़ सके इसके लिये LLB करने के लिये भी पहले pre LLB टेस्ट को अनिवार्य किया जा रहा है और म.प्र. में तो आप 45 वर्ष की उम्र के वाद न तो LLB कर सकते हैं और न ही कोर्ट में प्रेक्टिश करने के लिये सनद ही पा सकते हैं । हाँ अगर आप SC/ST/OBC या कुछ मालदार सवर्ण हैं तो आपके लिये शिक्षा का हर रास्ता खुला है । जय हो ! मैं brain drain के इस राष्ट्र व्यापी षणयंन्त्र के शीघ्र सफलता की कामना करता हूँ ।
विक्रम सिंह भदौरिया
ग्वालियर
२९-६-२०१५
गुरुवार, 25 जून 2015
मेरे जीवन में तुम ...
मेरी कविता में तुम ...
सीप में ,
समाई में ,
समाई हुई मोती सी ,
रात को चाँद ने
जब
विखेरा तुम्हें ,
क़तरा कतरा शवनम सा
चाँदनी की चादर पर ...
समेटता रहा
में ..
तुम्हें ..
जीवन भर
फिर फिर , सात जन्म तक ।
पर,
हाथ कब आती हो तुम
फिसल फिसल जाती हो तुम
हर वार इक नईँ हार
स्वीकार ...!
न तुम करती हो न मैं
....और यह जीवन
और वह मंृत्यु
चक्र है ...वस !
चलता रहता है
यूँ ही....!
विना रुके , विना थके
अहर्निश ।।
विक्रम सिंह भदौरिया
ग्वालियर २४-६-२०१५
नीलू नीलम की कविता (हाँ पढ़ी तुम्हारी कविता ) से प्रेरित
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015
...इक चाँद .....
इक चाँद का अक्स है मेरे दिल के आइने पर ।
इक तूफ़ाँ है जुनून बन कर हलचल मचाये हुये ।। - -...................... - विक्रम सिंहँ भदैरिया





