सोमवार, 27 जुलाई 2015

महा महिम अबुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम के महा प्रयाण पर

महा महिम अबुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम के महाप्रयाण पर ... 

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ऊँ द्यौ: शांति: अंतरिक्षं शांति:पृथ्वी: शांति: अग्नि पथया: शांति: .... । 


नि:शब्द है अग्निपथ ,

ज्योति हुई शांत है ।

पृथ्वी शांत है , 

आकाश हुआ शांत है ।।

चला गया दूर कहीं , 

प्रणेता अबुल पकीर ।

अग्नि के पँख लिये ,

अनन्त की उड़ान पर

 अनाथ कर राष्ट्र को ।।


श्रद्धा नु अश्रुपूरित नमन 

विक्रम सिंह भदौरिया । ग्वालियर 27-7-2015 सोम. 

रविवार, 28 जून 2015

शिक्षा में ठेकेदारी प्रथा की हिमायत और भगवा करण का विरोध ।

शिक्षा में ठेकेदारी प्रथा और शिक्षा 

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  के भगवा करण  का हौआ । 

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 आज देश में शिक्षा  में ठेकेदारी प्रथा के समर्थक ही हैं जो शिक्षा पद्यति में सुधार के किसी भी प्रयास का विरोध करने के लिये शिक्षा का भगवा करण का हौआ खड़ा करते है 



 हालात यह हैं कि प्रार्थमिक शिक्षा का पूर्ण रूपेण ठेकेदारी करण शासन ने कर दिया है और   उच्च शिक्षा को निजी शिक्षा उद्योग के हवाले करने के साथ साथ इस बात के पुख़्ता प्रवंध किये गये है कि प्रतिभावान लेकिन निर्धन विद्यार्थी किसी भी प्रकार से उच्च शिक्षा प्राप्त न कर सकें और अयोग्य लेकिन डफ़र विद्या की अर्थी आरक्षण या पैसे के बल पर  डिग्री प्राप्त  मूर्खों को शासन में उच्च पदों पर विराजमान करके राष्ट्र का ब्रेन ड्रेन करके उसे विकास पथ पर से पीछे ढकेला जा सके । 

    शिक्षा के ठेकेदारों यानि (संविदा शिक्षकों )की भर्ती के लिये   वाकायदा निविदायें आमन्त्रित की जाती है । और नक़ल से  थर्ड क्लास हायर सेकेण्डरी  पास पैसे के वल पर शिक्षा का बँटाढार करने यानि पढ़ाने का ठेका पा जाते हैं । 

दूसरी तरफ़  कला व समाजशास्त्र साहित्य व इतिहास की शिक्षा ठप्प हो चुकी है और उच्च तकनीकी शिक्षा का पूर्ण औद्योगिकीकरण सरकार ने  करके इसे भी शिक्षा माफ़िया के हवाले  कर दिया है । 

  नई शिक्षा नीति के तहत MBBS के आगे उच्च शिक्षा की अभिलाषा रखने वाले विद्यार्थी को PPG    के वहाने रोका जाता है वहीं अयोग्य विद्या की अर्थियों को सिर्फ जातिगत आरक्षण के सहारे भविष्य में  देश का कर्ण धार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया जाता है । अगर कोई मेधावी क्षात्र इन वाधाओं को पार करके आगे बढ़ कर शोध करने के लिये research करने की सोचे तो उसे फिर से  पी एच डी एन्ट्र्ेंस टैस्ट देना पड़ता है ।  क्योकि हमारी सरकार इस बात का पूख्ता इंतज़ाम कर देना चाहती है कि कोई मेधावी क्षात्र किसी भी तरह से राष्ट्र का ब्रेन वन कर उनके लिये ख़तरा न  वन पाये ।  

           इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये शिक्षा विभाग के नियम भी वनाये गये हैं कि  ,यदि कोई मेधावी छात्र  एक से अधिक विषय ों में एक साथ M A  या MSc या M PHIL करना चाहे तो , उसे इजाज़त नहीं हैं यह सरकारी नियम है ।    

  देश के कानून का ज्ञान होना हर व्यक्ति के लिये अनिवार्य माना जाता है  पर , इसके एक दम उलट  सरका यह पुख़्ता व्यवस्था करने जा रही है कि कानून कोई आसानी से न पढ़ सके इसके लिये  LLB करने के लिये भी पहले pre LLB टेस्ट को अनिवार्य किया जा रहा है और म.प्र. में तो आप 45 वर्ष की उम्र के वाद  न तो LLB  कर सकते हैं और न ही    कोर्ट में प्रेक्टिश करने के लिये सनद ही पा सकते हैं ।  हाँ अगर आप SC/ST/OBC या कुछ मालदार  सवर्ण हैं तो आपके लिये शिक्षा का हर रास्ता खुला है ।  जय हो ! मैं brain drain के इस राष्ट्र व्यापी षणयंन्त्र के  शीघ्र सफलता की कामना करता हूँ ।  

विक्रम सिंह भदौरिया 

ग्वालियर 

२९-६-२०१५ 



गुरुवार, 25 जून 2015

मेरे जीवन में तुम ...

P
मेरी कविता में तुम 

मेरी कविता में तुम ... 

सीप में ,

समाई में ,

समाई हुई मोती सी , 

रात को चाँद ने 

जब 

विखेरा तुम्हें ,

क़तरा कतरा शवनम सा 

चाँदनी की चादर पर ...

समेटता रहा 

में ..

तुम्हें ..

जीवन भर 

फिर फिर , सात जन्म तक । 

पर,

हाथ कब आती हो तुम 

फिसल फिसल जाती हो तुम 

हर वार इक नईँ हार 

स्वीकार ...!

न तुम करती हो न मैं 

....और यह जीवन 

 और वह मंृत्यु 

चक्र है ...वस !

चलता रहता है  

यूँ ही....!

विना रुके , विना थके 

अहर्निश ।। 


             विक्रम सिंह भदौरिया 

                 ग्वालियर २४-६-२०१५

नीलू नीलम की कविता (हाँ पढ़ी तुम्हारी कविता ) से प्रेरित 

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

...इक चाँद .....

इक चाँद का अक्स है मेरे दिल के आइने पर ।     

इक तूफ़ाँ है जुनून बन कर हलचल मचाये हुये ।।       -                                       -...................... - विक्रम  सिंहँ भदैरिया 

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

" सात जन्मों के बाद " Kamlesh Chauhan "Gauri " का नया उपन्यास

कमलेश चौहान "गौरी " का यह उपन्यास सात जन्मों के विशाल कैनवास पर उकेरी गई एक आदर्श प्रेम गाथा है  जहाँ दो प्रेमी ह्रदयों की मानव सुलभ    कोमल भावनाओं की कश्ती , बाल ,युवा व  ज़रा अवस्थाओं  से , जन्म- मृत्यु , देश -काल व देह की सीमाओं से वेखबर समय के उदधि में   , कवियत्री व उपन्यासकारा कमलेश चौहान के भावुक गीतों की स्वर लहरियों पर थिरकती कभी , मिलन व विछोह की  धूप -छाँव तले डोलती  मचलती सी कभी ,  सात जन्मों के विस्तीर्ण रंगमंच पर मंचित एक  नृत्य नाटिका सदृश्य  रचना है  जिसमें लेखिका मानव ह्दय के प्रेम के साथ साथ  सृष्टि व समिष्ठि के , भौतिक व पराभौतिकी के , कल्पना व यथार्थ के मिलन की अद्भुत प्रस्तुति करने में पूर्णत: सफल रहीं हैं,  और साथ ही  वह  अपने पूर्व उपन्यासों "सात समुन्द्र पार " तथा  "सात फेरों से धोखा " की तरह ही इस उपन्यास में भी वह अपनी स्त्री ह्र्दय की कुशल चित्रकार की छवि को प्रतिस्थापित करने में  पूर्णत:  सफल रहीं हैं ँ। मैं उनके पूर्व उपन्यासों , कविताओं तथा  पटकथाओं की भाँति इस उपन्यास की  भी काल जयी रचनाओं में शुमार होने की ,और सफलता की ,  कामना करता हूँ । 
                            Vikram singh bhadoriya   
                             Ghatigaon GWALIOR 
                     
              7-2-2015 

शनिवार, 31 जनवरी 2015

Vikramaark.blogspot: कविता

Vikramaark.blogspot: कविता: कविता दिल की रूकी हुई झील के तटबंध तोड़कर वह निकली नदी है ... कविता समय की दुकूल पर हवा की उँगलियों के कोमल स्पर्श की सिहरन है ...  कविता ...

कोल्हू का बैल ....

management को कभी नहीं पता होता कि कौन employee काम कर रहा है ... काम न करने वाले  गधे को इनामऔर काम करने बाले घोड़े को सज़ा  और यह सिलसिला जारी रहता है  कोल्हू के बैल के रिटायरमेंट तक .... !  एक अच्छा आॅफिसर अनिवार्य रूप से एक अच्छा मेनेजर  भी होना ही चाहिये   लेकिन उपरोक्त कमज़ोरी  जो कि मूलत: उसके अधीनस्थ चमचा टाइप व चुगलखोरों की गैलेक्सी की बजह से होती है और उसकी टीम की कार्य शक्ति को बुरी तरह प्रभावित  करती है ।  @vinod k Tripathi ji


Vikram singh bhadoriya TI 

Ghatigaon  28-1-15 o