एक सवाल चाँद से 
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क्यों निकलते हो तुम अकेले तन्हां सुनसान रातों में
वीरान सड़कें ,
रात का सन्नाटा
ऊँघते हुये पेड़
शिकायतें करती
उदास
पत्थर दिल चट्टानें
और दूर सपनों के देश में
मुस्कुराती हुई तुम .............!
Vikram singh bhadoriya
५-a११-१४ घाटीगाँव --
Bahoot Khubsurat
जवाब देंहटाएंThank @kamlesh chauhan is kind prerna mujhe tumhi set mili hai isliye tumhi ko samarpit hai
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