वही न ,
जो तुमने लिखा था कभी ,
अपनी यादों की कलम से
बक्त के सीने पर
इ"च दर इ"च
तुमने ...
जो विखेरा था ..
मेरे बजूद को
जर्रा जर्रा..... ,हरफ दर हरफ़
कोमा ,अल्प विराम और पुर्ण विराम के विना.....
ओ वक्त! जरा ठहरो ,
कर सकूँ मैं हिसाब उसका ....ँ
जो है मेरी पोटली में
समेटे हुये
कुछ लम्हे तुम्हारीयादों के
तुम्हारी कलम से गिरे हुये कुछ स्वर्ण बिन्दु
कुछ आहें
कुछ स्मित हास्य
तुम्हारे अधरों का ...
तुम्हारी कलम केहाथों से बुने हुय...े
कुछ अक्षरों के गुच्छे हैं
तुम्हारी यादों के उलझे हुये खयालों की तरह .
Vikram singh bhadoriya
20-07-2017 Bhind


A fabulous poem of artistic profound sense of life and memoir with hidden power symbol of Narrishakti.
जवाब देंहटाएंA fabulous poem of artistic profound sense of life and memoir with hidden power symbol of Narrishakti.
जवाब देंहटाएंबहुत खूब सर हमेशा की तरह टिपणी कर हर्ष होता है
जवाब देंहटाएंYaadon ko samet kr dil ki kalam se inch dar inch pannon pr ukerna koi asaan kaam nahin ,kuchh swaran bindu chun chun kar aapne rachna ko anmol bana diya ������
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